सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग

सूर्य के बिना हमारी पृथ्वी पर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। सूर्य के जितने भी लाभ गिनाये जायें कम हैं, किन्तु सूर्यकिरणों के सेवन की सही विधि ज्ञात न होने के कारण सामान्यजन लाभ के स्थान पर हानि अधिक उठाते हैं। सूर्य–स्नान, सूर्यत्राटक, सूर्यनमस्कार, सूर्य अर्घ्य आदि अनेकानेक विधियाँ भी एक सीमा में ही लाभप्रद हैं।
सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग’एक ऐसी सरल, शास्त्रासम्मत तथा वैज्ञानिक विधि है, जिसके द्वारा सूर्य की अमृतरश्मियों का पान करते हुए केवल रोग और बुढ़ापा ही नहीं बल्कि भूख–प्यास जैसी सीमाओं को भी पार करना संभव है। गृहस्थ हो या संन्यासी, आस्तिक हो या नास्तिक, बच्चा हो या बूढ़ा, रोगी हो या योगी, यहाँ तक कि मृत्युशैय्या पर पड़ा व्यक्ति भी इस साधना से लाभ उठा सकता है। जो जहाँ पर है, उसको वहीं से आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाता है। रोगी को स्वास्थ्य, विद्यार्थी को मस्तिष्क की तीक्ष्णता, गृहस्थ को वीर्यशक्ति और ऊर्जा तथा साधक को अन्तर्मुखता प्राप्त होती है। अब तक एक लाख से अधिक लोगों के जीवन में प्रविष्ट यह अनुभव–धारा अनवरत प्रगतिशील है।
आप भी विलक्षण सूर्य साधना की इस प्रथम पुस्तक को पढ़ें और लाभ उठायें।

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