विचार मन्थन Archive

  • श्रीमद्भागवत गीता का मुख्‍य सन्‍देश है- ‘कर्मण्‍येवाऽधिकारस्‍ते मा फलेषु कदाचन्’। इसी को सरल भाषा में कहा गया है- ‘कर्म किये जा फल की इच्‍छा मत कर रे इन्‍सान, जैसा कर्म […]

    कर्म का रहस्‍य

    श्रीमद्भागवत गीता का मुख्‍य सन्‍देश है- ‘कर्मण्‍येवाऽधिकारस्‍ते मा फलेषु कदाचन्’। इसी को सरल भाषा में कहा गया है- ‘कर्म किये जा फल की इच्‍छा मत कर रे इन्‍सान, जैसा कर्म […]

  • किसी गांव में चार अन्धे रहते थे। एक बार उनके गांव में हाथी आया। उन्होंने पहले कभी हाथी देखा न था, इसलिये उन्हें भी उत्सुकता हुई कि चलों देखें यह […]

    धर्म क्या है?

    किसी गांव में चार अन्धे रहते थे। एक बार उनके गांव में हाथी आया। उन्होंने पहले कभी हाथी देखा न था, इसलिये उन्हें भी उत्सुकता हुई कि चलों देखें यह […]

  • वर्तमान युग एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक ओर भौतिकतावाद अपनी चरम सीमा पर है तो दूसरी ओर अध्याउत्मम के क्षेत्र में भी उतनी ही तीव्रता से खोज-बीन […]

    भगवान का अस्तित्व

    वर्तमान युग एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक ओर भौतिकतावाद अपनी चरम सीमा पर है तो दूसरी ओर अध्याउत्मम के क्षेत्र में भी उतनी ही तीव्रता से खोज-बीन […]

  • कभी आपने आसमान में उड़ती पतंगों को देखा है? रंग-बिरंगी, छोटी-बड़ी, तरह-तरह की पतंगें आसमान में ऊपर-नीचे, दांये-बायें उड़ती फिरती हैं। एक बार ऐसे ही आसमान में उड़ रही एक […]

    जीवन की डोर

    कभी आपने आसमान में उड़ती पतंगों को देखा है? रंग-बिरंगी, छोटी-बड़ी, तरह-तरह की पतंगें आसमान में ऊपर-नीचे, दांये-बायें उड़ती फिरती हैं। एक बार ऐसे ही आसमान में उड़ रही एक […]

  • चौंकिये मत प्रश्न बिल्कुल सही है। किसी भी व्यक्ति से यह पूछिये कि उसे जीवन में क्या चाहिये तो प्राय: यही उत्तर मिलता है कि मुझे सुख चाहिये। यह सुख […]

    क्या हमें वास्तव में सुख चाहिये ?

    चौंकिये मत प्रश्न बिल्कुल सही है। किसी भी व्यक्ति से यह पूछिये कि उसे जीवन में क्या चाहिये तो प्राय: यही उत्तर मिलता है कि मुझे सुख चाहिये। यह सुख […]

  • बहुत पुराने समय की बात है। एक जंगल में एक महात्मा निवास करते थे। जंगल के दोनों ओर दो अलग-अलग राज्य थे। दोनों के ही राजा महात्मा के पास आया […]

    कर्म और भाग्य

    बहुत पुराने समय की बात है। एक जंगल में एक महात्मा निवास करते थे। जंगल के दोनों ओर दो अलग-अलग राज्य थे। दोनों के ही राजा महात्मा के पास आया […]

  • एक बार एक महफिल सजी हुई थी और लोग आपस में हंसी-ठिठोली कर रहे थे। तभी वहाँ पर एक बुजुर्ग सज्‍जन आये और आते ही उन्‍होंने एक बड़ी गुदगुदाती हुई […]

    हास्य अमृत

    एक बार एक महफिल सजी हुई थी और लोग आपस में हंसी-ठिठोली कर रहे थे। तभी वहाँ पर एक बुजुर्ग सज्‍जन आये और आते ही उन्‍होंने एक बड़ी गुदगुदाती हुई […]

  • वर्ष नूतन हर्ष नूतन, नित्‍य हो उत्‍कर्ष नूतन ।। स्‍वार्थ से परमार्थ पथ पर, फिर करें वो विमर्श नूतन ।। स्‍वास्‍थ्‍य हो, सद् बुद्धि हो और हो सदा उत्‍साह नूतन […]

    नव सम्‍वत की शुभकामनाएं

    वर्ष नूतन हर्ष नूतन, नित्‍य हो उत्‍कर्ष नूतन ।। स्‍वार्थ से परमार्थ पथ पर, फिर करें वो विमर्श नूतन ।। स्‍वास्‍थ्‍य हो, सद् बुद्धि हो और हो सदा उत्‍साह नूतन […]

  • आई दीवाली आई दीवाली, दीप सजे और धूम मची चहुं ओर है ढूंढो-ढूंढो इस प्रकाश में, मन में छिपा जो चोर है। ब्रह्म वही मर्यादा में बंध, राम बना जग […]

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

    आई दीवाली आई दीवाली, दीप सजे और धूम मची चहुं ओर है ढूंढो-ढूंढो इस प्रकाश में, मन में छिपा जो चोर है। ब्रह्म वही मर्यादा में बंध, राम बना जग […]