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In English :

Surya English

A Handbook to Siddhamrit Surya Kriya Yoga

Siddhamrit Surya Kriya Yoga (SSKYoga) emerged with a huge bang on the scene. Its inventor, Swami Buddh Puri Ji is confident that through it the age-old Gordian knot on the path of Mahayoga can be opened. Using it, it is actually possible for the Divine Consciousness to manifest itself clearly in the body of the practitioner, such that the body too becomes Divine. Such a body, as a side-story would not die, just like Swami Ramalingam’s was.

However, keeping apart those lofty goals SSKYoga has much to offer for a beginner too. Starting from a very accessible level, easy enough to be performed by a child or a great grandfather, it utilizes the life-giving rays of the sun to bring total health to the body and mind of the practitioner. Numerous cases affirming this statement have been registered.

In this Handbook to Siddhamrit Surya Kriya Yoga, you will read about the basic philosophy behind the practice; a detailed look at level 1 of this practice. For SSKYoga practitioners, the section on Frequently Asked Questions would be very useful too. A must-read for anyone exploring avenues for greater health, joy, light, and bliss in everyday life.


Surya Kriya ( The pathway to immortality)

Surya Kriya: The Pathway to Immortality

Swami Ramalingam – the deathless saint, Mahavtar Babaji – the Immortal Master, Sri Aurobindo – the spiritual revolutionary extraordinaire, Lord Hanuman – the foremost exponent of Solar Science, are few among those Masters whose words and descriptions await you in this book. Surya Kriya: The Pathway to Immortality is at once both a path and a practice that traces the trail of these adept masters as they transformed from being ordinary humans to becoming superhuman immortal masters. To a yearning aspirant the book describes a direct practical path in form of Siddhamrit Surya Kriya Yoga to begin at once this ascent to the immortal state. To the skeptic the book talks in enough depth, taking recourse to the scriptures and researches of the medical science wherever necessary, to bring forth the point that human evolution to state of superhuman existence, which is free from disease, old age, death and a harbinger of the Divine Consciousness upon the material plane of existence is a fantasy with full potential of becoming a reality.


Sanjeevani EnglishSanjivani Kriya (Esoteric Science of Pranayam)

This book discusses the 1st level of Sanjivani Kriya that revitalizes our body & revivify our mind by upgrading our normal breathing into complete yogic breath. As we progress, pranayama happens in every breath that keeps us connected with the source of life, all the time.

 

 

 

 


SMT EnglishAn ultimate & rare creation – Human body [‘Arena of God’s play’]

The whole creation is manifested in the so called mortal physical human form- the body- measuring just a few feet. This manifestation is unique in its own way- obvious, but concealed. Exploration of the esoteric secrets of human form, is the simplest path for exploration of the universe, and beyond. The Mahasadhana of permeating even the grossness and mortality with the nectar of blissful consciousness, is possible only in the human body. This book is a treasure of guidance for the sincere seekers, desirous of venturing on to the supreme path of this most exalted Mahasadhana.

 

 


Bon Apetite

Bon Apetite (Food for Spiritual Evolution)

Man is not a social animal; he is the very salt of divinity. Within man resides secrets galore, waiting to explode. In the ascent of man to a better, higher form, the food that he eats plays a crucial role. Apart from presenting the art, science & philosophy of food, this book asks a central question: Must man switch to a 100% meat free diet? Of Course!

 

 

 

 

 

 

In Hindi & Punjabi :

Capture 1Captureकुण्ड अग्नि शिखा- यह त्रैमासिक पत्रिका, हिन्दी व पंजाबी में अक्टूबर 2001 से लगातार प्रकाशित हो रही है। इसमें जपुजी साहिब की व्याख्या, सिद्ध सन्तों के साधना जीवन की चर्चा के अलावा गम्भीर साधना रहस्यों को सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। सफल जीवन जीने के तरीके, प्रेरणादायक बोधकथायें और साधकों की जिज्ञासाओं के समाधान भी इसमें दिये जाते हैं। इसकी सदस्यता 15 वर्ष (रु० 1100), 6 वर्ष (रु० 500), 3 वर्ष (रु० 250), 1 वर्ष (रु० 100) है।

 

 

 


Surya Hindiसिद्धामृत सूर्य क्रियायोग- सूर्य जीवन का आधार है, यह एक अटल सत्य है, जिसे धर्मशास्त्र ही नहीं विज्ञान भी मानता है। आधुनिक वैज्ञानिकों ने सामान्य रोगों में ही नहीं वरन् कैंसर, ओस्टियोपोरोसिस, मल्टीपल स्क्लैरोसिस, पक्षाघात एवं हृदय रोग जैसी अनेक जटिल समस्याओं तथा डिप्रेशन आदि मनोरोगों में भी सूर्य किरणों के द्वारा उपचार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोग्य के साथ ध्यान-साधना का आधार भी सनातन परम्परा में सूर्य को माना गया है। यह पुस्तक उन प्राचीन सिद्धान्तों, नवीन प्रयोगों, सूर्य से रोग निवारण की प्रक्रिया तथा साधना विधि की कुंजी है।

 

 

 

 


Sanjeevani Hindiसंजीवनी क्रिया (प्राणायाम का प्रामाणिक विज्ञान)- यह तो सभी जानते हैं कि श्वास है तो जीवन है और इसीलिये योग का प्रचार होने के बाद घर-घर में प्राणायाम शुरू हो गया, लेकिन अनेक लोगों को इससे लाभ होने के स्थान पर कष्ट हो गया, कुछ तो रोगी भी हो गये। आश्चर्य है कि अनेक प्राणायाम कराने वाले भी रोगी और स्थूलकाय बने हुये हैं, जबकि प्राणायाम का लक्षण ही है, शरीर का हल्का और स्फूर्तिवान होना। कारण- श्वास के विज्ञान का पता न होना। संजीवनी क्रिया हमें उस विज्ञान से परिचित कराती है और अत्यन्त सहज ढंग से, जिसे बच्चा-बूढ़ा-रोगी कोई भी कर सकता है, हमें अपने शरीर में प्राण का संचार करना सिखाती है। इसके साथ-साथ बैठने, खड़े होने, चलने आदि का सही तरीका तथा आँख, कान आदि ज्ञानेन्द्रियों को स्वस्थ रखने वाली अनेक सूक्ष्म क्रियायें सिखाती है।

 

 

 


Agni Hindiअग्नि क्रिया योग (यज्ञ से कुण्डलिनी जागरण)- अग्नि को देवताओं का मुख कहा गया है; उसके माध्यम से हम किसी भी देवी-देवता तक अपनी प्रार्थना पहुँचा सकते हैं और उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। प्रायः सुनते-पढ़ते ही हैं कि प्राचीन काल में वर्षा के लिये, सन्तान के लिये और सभी कामनाओं की पूर्ति हेतु यज्ञ किये जाते थे एवं फल भी प्राप्त होता था। यज्ञ तो आज भी होते हैं किन्तु प्रायः निष्फल, क्यों? क्योंकि यज्ञदेव से सम्बन्ध नहीं जुड़ता, शरीर के भीतर कुण्डलिनी-अग्नि जागरण नहीं होता। यह पुस्तक हमें वह सारे सिद्धांत और विधि बताती है।

 

 

 

 

 


Ek jagrit mahayog parampraएक जाग्रत महायोग परम्परा- भारत भूमि ट्टषि-मुनियों की भूमि है, किन्तु काल के प्रभाव से प्रायः अधिकांश साधना परम्परायें लुप्त-गुप्त होती जा रही हैं। मानव समाज के उत्थान के लिये सर्वस्व समर्पण तो दूर की बात है, भौतिक चकाचौंध से भरे इस युग में निज मुक्ति का प्रयास करने वाले भी अल्प ही हैं। फिर भी इसी कलियुग से सतयुग का जन्म होना है और इसके लिये कहीं-कहीं सन्त-महापुरुष प्राण-प्रण से युग परिवर्तन की महायोग साधनाओं में जुटे हुये हैं। ऐसी ही एक जाग्रत परम्परा के तीन महायोगियों-मृत्युञ्जयी  स्वामी मेवापुरी जी, युगावतार स्वामी देवपुरी जी ‘काली कम्बलीवाले’ और परमहंस स्वामी दयालुपुरी जी के दिव्य साधना जीवन की कुछ झलकियाँ जिज्ञासुओं की प्रेरणा हेतु इस पुस्तक में प्रस्तुत हैं।

 

 

 

 


Sri Yantraश्रीयन्त्र की चमत्कारी साधना और त्रिपुर शिवा पीठम- श्रीयन्त्र साधना को प्रायः अत्यन्त शक्तिशाली किन्तु रहस्यमयी और जटिल माना जाता है। महायोगी स्वामी बुद्धपुरी जी ने शास्त्रें में वर्णित श्रीविद्या के रहस्यों को साधना द्वारा प्रत्यक्ष करके अपने अनुभूत ज्ञान को जिज्ञासुओं की प्रेरणा के लिए इस पुस्तक में अत्यन्त सरल एवं सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। श्रीयंत्र-निर्माण की जटिल विधि तथा उपासना की विधियों एवं मन्त्रें को भी अत्यन्त रोचक एवं सरल रूप में प्रस्तुत किया है। किसी भी साधक के लिये यह एक अनमोल ग्रन्थ है।

 

 

 

 

 


Satopanthअगम्य साधना स्थल: सतोपन्थ- यह सत्यगाथा है बद्रीनाथ धाम से 25 कि-मी- दूर, लगभग 14000 फीट की ऊँचाई पर स्थित दिव्य स्थली सतोपन्थ की अभूतपूर्व दुर्गम यात्र तथा एक मास चली अलौकिक साधना की। एकादशी की मंगलमयी बेला में महाशक्ति विष्णु का साक्षात् रोमांचकारी अवतरण तथा साधकों की अलौकिक स्थिति किसी भी जिज्ञासु के मन को झकझोर कर रख देती है।

 

 

 

 

 


Amritanubhavअमृतानुभव- महायोगी स्वामी बुद्धपुरी जी के जपयज्ञ सम्बन्धी प्रवचनों का यह अनमोल संग्रह किसी भी जिज्ञासु के लिये महान मार्गदर्शन है। नाम की महिमा, नामजप द्वारा शक्तिजागरण और जाप की विभिन्न विधियों तथा स्तरों का गूढ़ विवेचन, युक्तियों और शास्त्र प्रमाणों के साथ अनुभवपूर्ण इतनी सरल भाषा में दिया गया है कि कोई भी साधक सहज ही प्रेरणा और मार्गदर्शन ले सकता है।

 

 

 

 

 


Sadhana Sutraसाधना सूत्र- यथा नाम तथा गुण के आधार पर इस पुस्तिका में परम पूज्य स्वामी बुद्धपुरी जी के प्रवचनों से साधना सम्बन्धी प्रायोगिक सूत्रें का संकलन किया गया है। जिज्ञासुजन निस्संदेह इन सूत्रें का प्रयोग करके अपने जीवन को निर्मल, आध्यात्मिक रूप से प्रगतिशील, सुखी तथा स्वस्थ बना सकते हैं।

 

 

 

 

 

 


Bodh Kबोध कथायें- कथा-कहानियाँ मात्र बाल-मनोरंजन का साधन नहीं वरन् चरित्र निर्माण का आधार हैं। इसी तथ्य को प्रमाणित करते हुए ट्टषि-मुनियों ने परमात्मा तत्व विषयक गूढ़ वेद-ज्ञान को सरस एवं सरल पुराण कथाओं के रूप में जनसामान्य में प्रचारित किया जो कि निज बोध के जागरण की प्रेरणा रूप में आप सबके समक्ष इस पुस्तक में प्रस्तुत है।

 

 

 

 

 

 


Akal Path HindiAkal Path Punjabiअकाल पथ (हिन्दी व पंजाबी)- सुषुम्ना का राजपथ ही दशमद्वार से होकर ब्रह्मलोक तक की यात्र तय करवाता है। इस लघु पुस्तिका में उस पथ का सूक्ष्म वर्णन तथा उसके अनुसन्धान की विधि का अत्यन्त सरस विवेचन है।

 

 

 

 

 

 


SMT HindiSMT Punjabiसुदुर्लभ मानव तन (हिन्दी व पंजाबी)- साढ़े तीन हाथ के मानव पिण्ड में, गुप्त-प्रकट रूप में सारा ब्रह्माण्ड ही समाया हुआ है। यदि ब्रह्माण्ड के रहस्यों की खोज करनी है तो मानव पिण्ड के रहस्यों की खोज ही सीधा पथ है। दुर्लभ मानव तन को, परमेश्वरी महाशक्ति की क्रीड़ास्थली बनाकर, मर्त्यलोक को ही सत्यलोक, आनन्दधाम में रूपान्तरित करने की महासाधना के इस संक्षिप्त विवरण से जिज्ञासु सुधीजन स्वानुभव-आधारित क्रमानुसार-वर्णित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

 

 


Patralokपत्रालोक- प्रायः ग्रहस्थ साधकों के लिये सदा गुरु चरणों में निवास अथवा बार-बार मिलन सम्भव नहीं किन्तु बिना मार्गदर्शन के साधन पथ पर बढ़ना भी असम्भव है। यह दूरी पत्रें के माध्यम से मिटाई जा सकती है। इस पुस्तक में ऐसे ही कुछ पत्रों के महाराज जी (महायोगी स्वामी बुद्धपुरी जी) द्वारा लिखे गये कृपापूर्ण उत्तरों को सर्वसामान्य के कल्याण हेतु दिया गया है।

 

 

 

 

 

 

Patravali I Patravali IIमहाराज जी के गुरु स्वामी दयालुपुरी जी के मार्गदर्शक दुर्लभ पत्रों का संग्रह भी दो भागों में पत्रावली के नाम से उपलब्ध है।

 

 

 

 

 

 

 


Sri Kambli waleश्री गुरुदेव चरितावली- सन्तों का चरित्र सदा ही भक्तों को सन्मार्ग पर चलाने में सहायक होता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु स्वामी दयालुपुरी जी द्वारा अत्यन्त मनोहारी भाषा एवं अलंकारिक शैली में रचित प्रभु कम्बलीवाले का जीवन चरित प्रस्तुत किया गया।

 

 

 

 

 

 

 


Gyanamritज्ञानामृत (काव्यग्रन्थ)- जब तन-मन पूर्णतः प्रभु प्रेम में रंगे जाते हैं तो दिव्य प्रेम रस का दरिया स्वाभाविक ही वाणी के माध्यम से छलकने लगता है। श्री महाराज जी के बद्रीनाथ धाम में एक वर्ष के गुफावास के समय प्रभु की ऐसी ही कृपा हुयी। इस कृपा प्रसाद को ही, जिसमें आम जीवन को साधनामय बनाने के स्वर्णिम सूत्र दिये हुये हैं, पुस्तक रूप में प्रकाशित किया गया है।

 

 

 

 

 

 


Bhajnamritभजनामृत (पंजाबी)- महायोगी स्वामी बुद्धपुरीजी समय पाकर संगीत साधना विषयक अनेक प्रयोग करते रहते हैं, जिनमें सात सप्तकों में स्वर विस्तार भी शामिल है। उनके अनुसार संगीत को साधना बनाने के लिये उसे अन्तर्निहित भगवान के अर्पण करना होगा। महाराज जी द्वारा रचित भजनों का यह संग्रह है।

 

 

 

 

 

 


Chingar Ton Brahma Jotचिंगार तों ब्रह्मज्योति (पंजाबी)- परमब्रह्म परमात्मा ने सृष्टि के विस्तार हेतु बीजरूप से अपने ही अंश को इस सृष्टि में प्रसारित कर दिया। इस बीजरूपी चिंगार को पूर्ण ब्रह्मज्योति के रूप में कैसे पुनर्प्रकाशित करना है, इसकी खोज में धर्म और विज्ञान सदियों से लगे हुये हैं। सृष्टि के रहस्य की सारभरी विवेचना तथा उस पर विजय पाने के जप, तप, भक्ति, ज्ञान, सेवा, योग आदि अनेकानेक साधनों का सूक्ष्म विश्लेषण ही इस वृहद् ग्रन्थ की विषयवस्तु है।

 

 

 

 


Dera Harisar HindiDera Harisar Punjabiडेरा हरिसर – एक परिचय (हिन्दी पंजाबी)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

In Greek : 

http://www.shabadsuratsangam.org/books/a-new-book-in-greek-language/