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बोध कथाएं: कथा-कहानियाँ मात्र बाल-मनोरंजन का साधन नहीं वरन चरित्र निर्माण का आधार हैं। इसी तथ्य को प्रमाणित करते हुए ऋषि-मुनियों ने परमात्मा तत्व विषयक गूढ वेद ज्ञान को सरस एवं सरल पुराण कथाओं के रूप में जन सामान्य में प्रचारित किया। मन तथा बुधि से परे के परमात्म तत्व को सीधा ग्रहण करना हमारी स्थूल सीमित बुधि के लिये सम्भव नहीं है। कथाओं में इन्द्रिय गम्य घटनाओं तथा दृष्टांतों का सहारा लेकर उस इन्द्रियातीत अनिर्वचनीय तत्व को दार्ष्टांत रूप में धारण करने का प्रयास किया जाता है। इस प्रकार कथाएं बोध जागृत करने का प्रबल साधन बन जाती हैं।

शब्द सुरति संगम आश्रम से प्रकाशित त्रैमासिक आध्यात्मिक पत्रिका ‘कुण्ड अग्नि शिखा’ में निरंतर ऐसी कथाओं का प्रकाशन होता है। उन्हीं में से चुनी हुई 51 कथाओं का यहाँ संकलन निज बोध के जागरण की प्रेरणा रूप में आप सबके समक्ष इस पुस्तक में प्रस्तुत है।

 


 

A Handbook to Siddhamrit Surya Kriya Yoga: Siddhamrit Surya Kriya Yoga emerged with a huge bang on the scene. Its inventor, Swami Buddh Puri Ji is confident that through it the age old Gordian knot on the path of Mahayoga can be opened. Using it, it is really possible to for the Divine Consciousness to manifest itself clearly in the body of the practitioner, such that the body too becomes Divine. Such a body, as a side-story would not die, just like Swami Ramalingam’s was.

However, keeping apart those lofty goals SSKYoga has much to offer for the beginner too. Beginning from a very accessible level, easy enough to be performed by a child or a great grandfather, it utlilizes the life giving rays of the sun to bring total health to the body and mind of the practitioner. Numerous cases affirming this statement have been registered.

In this Handbook to Siddhamrit Surya Kriya Yoga, you will read about the basic philosophy behind the practice, a detailed look at level 1 of this practice. For SSKYoga practitioners, the section on Frequently Asked Questions would be very useful too. A must read for an anyone exploring avenues for greater health, joy, light and bliss in everyday life.

 


 

सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग : सूर्य के बिना हमारी पृथ्वी पर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। सूर्य के जितने भी लाभ गिनाये जायें कम हैं, किन्तु सूर्यकिरणों के सेवन की सही विधि ज्ञात न होने के कारण सामान्यजन लाभ के स्थान पर हानि अधिक उठाते हैं। सूर्य–स्नान, सूर्यत्राटक, सूर्यनमस्कार, सूर्य अर्घ्य आदि अनेकानेक विधियाँ भी एक सीमा में ही लाभप्रद हैं।

सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग’एक ऐसी सरल, शास्त्रसम्मत तथा वैज्ञानिक विधि है, जिसके द्वारा सूर्य की अमृतरश्मियों का पान करते हुए केवल रोग और बुढ़ापा ही नहीं बल्कि भूख–प्यास जैसी सीमाओं को भी पार करना संभव है। गृहस्थ हो या संन्यासी, आस्तिक हो या नास्तिक, बच्चा हो या बूढ़ा, रोगी हो या योगी, यहाँ तक कि मृत्युशैय्या पर पड़ा व्यक्ति भी इस साधना से लाभ उठा सकता है। जो जहाँ पर है, उसको वहीं से आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाता है। रोगी को स्वास्थ्य, विद्यार्थी को मस्तिष्क की तीक्ष्णता, गृहस्थ को वीर्यशक्ति और ऊर्जा तथा साधक को अन्तर्मुखता प्राप्त होती है। अब तक एक लाख से अधिक लोगों के जीवन में प्रविष्ट यह अनुभव–धारा अनवरत प्रगतिशील है। आप भी विलक्षण सूर्य साधना की इस प्रथम पुस्तक को पढ़ें और लाभ उठायें।

 


 

संजीवनी क्रिया : यह पुस्तक योग–साधना (आसन–प्राणायाम) विषयक कोई नया दृष्टिकोण नहीं  प्रतिपादित कर रही है, बल्कि यह तो हमें उससे भी आवश्यक तथ्य से परिचित  कराता है, वह है जीवनदायी श्वास का विज्ञान और उसे शरीर में पूर्णतया भरने  की कला। क्योंकि अधूरा और उथला श्वास न केवल हमारी जीवनी–शक्ति में कमी  लाता है बल्कि Anti-oxidants की मात्रा घटाकर Free Radicals के रूप में  शरीर में जहर भी जमा करता जाता है। संजीवनी क्रिया उक्त Free Radicals को  अवशोषित कर इन सारी समस्याओं का सहज ही समाधान करती है और हमारे शरीर को  निरोग तथा दीर्घायु बनाने में अत्यन्त प्रभावशाली सिद्ध होती है।

यह मात्रा आश्चर्य ही नहीं दु:ख की भी बात है कि लोग जीवन की समस्त  क्रियाकलापों के आधारभूत श्वास विज्ञान के बारे में शिक्षा प्राप्त करने का  तनिक भी प्रयास नहीं करते और अनजाने ही जीवनपर्यन्त अधूरा तथा  मृत्युग्रसित श्वास लेते रहते हैं। यह पुस्तक इस दिशा में प्रथम प्रामाणिक  प्रयास है जो लेखक की 40 वर्षों की साधना और लाखों लोगों पर किये गये  प्रायोगिक अनुभवों पर आधारित है।

 


 

 

Surya Kriya: The Pathway to Immortality: Swami Ramalingam – the deathless saint, Mahavtar Babaji – the Immortal Master, Sri Aurobindo – the spiritual revolutionary extraordinaire, Lord Hanuman – the foremost exponent of Solar Science, are few among those Masters whose words and descriptions await you in this book. Surya Kriya: The Pathway to Immortality is at once both a path and a practice that traces the trail of these adept masters as they transformed from being ordinary humans to becoming superhuman immortal masters. To a yearning aspirant the book describes a direct practical path in form of Siddhamrit Surya Kriya Yoga to begin at once this ascent to the immortal state. To the skeptic the book talks in enough depth, taking recourse to the scriptures and researches of the medical science wherever necessary, to bring forth the point that human evolution to state of superhuman existence, which is free from disease, old age, death and a harbinger of the Divine Consciousness upon the material plane of existence is a fantasy with full potential of becoming a reality.

 


 

अग्नि क्रिया योग (यज्ञ से कुण्डलिनी जागरण): प्राचीन समयों में परमपद सच्चिदानन्द परमात्मा की प्राप्ति हेतु दो ही मुख्य साधनाओं का प्रचलन रहा है। यह दो साधनायें हैं- बहुप्रचलित (1) सूर्य साधना, तथा (2) अग्नि साधना। सूर्य साधना ही ऋषि अनुमोदित ‘सन्‍ध्‍या’ है तथा अग्नि साधना को ही ‘यज्ञ’ अथवा ‘अग्निहोत्र’ का नाम दिया जाता रहा है। यद्यपि सन्‍ध्‍या और यज्ञ का प्रचलन अब भी है, किन्तु् जब तक अग्नि के साथ यज्ञकर्ता का सम्बन्ध‍ नहीं होता, तब तक अग्निहोत्र अथवा यज्ञक्रिया केवल शुष्क कर्मकाण्ड बनी रहकर निष्प्र्भावी ही रहती है। यदि अग्नि के सम्मुख बैठकर भी अग्निदेव के साथ आहुति डालने वालों का सम्बन्ध न हो और ऐसा करने पर भी वह ऋषियों के समान तेजस्वी और वेदज्ञ बनना चाहे तथा सोचे कि उसके तेज के सामने मृत्यु भी भयभीत हो, तो यह कैसे सम्भव हैॽ
पुरातन ऋषियों ने अग्निदेव के साथ सम्बन्ध  स्थापित करने के लिये पहले कुण्ड में अग्नि प्रचण्ड करके उस अग्नि के साथ नाता जोड़ा, जिससे उनका शरीरस्थ सुषुम्ना पथ अग्निमय हो उठा। तदनन्तर इस पथ पर अग्रसर होते हुये उन्होंने परमदेव परमात्मा की प्राप्ति की, क्योंकि सम्पूर्ण अग्नियों का भी अग्नि ही तो परमदेव है। अग्निदेव के साथ सम्बन्ध‍ जोड़ने की क्रिया का नाम है ‘अग्नि क्रिया योग’। पुरातन ऋषियों ने इसी अग्नि क्रिया योग के द्वारा अपने आप को अग्निमय बनाकर अग्निदेव के माध्यम से ब्रह्माण्ड व्यापिनी समस्त दैवी शक्तियों से सम्बन्ध स्थापित किया। अपरिमित शक्ति अर्जित करके प्रकृति को विश्व कल्याण कार्यों में प्रयुक्त करने की साधनायें कीं, पारलौकिक तथा लौकिक सब प्रकार की समृद्धता प्राप्त की। इसी अग्नि क्रिया योग की चर्चा इस पुस्तक में की गई है।

 


 

Kund Agni Shikha (Hindi & Punjabi) : A quarterly Magazine containing teachings of Swami Ji in a special compilation of articles, poem & answers to questions asked by aspirants and practitioners pertaining the multifaceted behavior of Yog. How can one find a healthy body, mind and spirit? How can one find everlasting happiness? What is the purpose of life? How to choose the right path & how to check whether we are on it? How are all the different Yog practices such as Asana (physical), Hath (pranic), Raj (mental), Bhakti (emotional), Gyan (intellectual), Karm (selfless service), Dhyan (meditation), Samadhi (trance) etc. are but different perspective of single path? What is the relation between all these? What and how are the experiences of the other world? What practices lead various saints to their place? How could we make our life meaningful, starting at our present state? And much more…

 


 

Akal Path (Punjabi & Hindi): This book is Swami Ji’s maiden creation, in which he is answering the mystic queries of the seeker. It has delineated the ways to attain the fruit of the penance of years in moments. All the doubts and skepticism concerning the Prana (vital energy channeled by breathe), the Manas (mind) and their ultimate abode find their resolutions. This book can be treates as a ready reckoner for the beginners as it explains the importance and form of Guru-Mantra in detailed but simple language. In addition it discusses the various primary techniques to start Mantra Sadhna even before one has taken initiation. And how to prepare for initiation. This book privides a clear direction to an aspirant taking examples from scriptures and expereinces.

 

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Amritanubhav (Hindi): This book contains a collection of his discourses mainly focusing on one single theme i.e. role of Sadhak (aspirant), Guru (guide) and Mantra in anybody’s spiritual evolvement. In nine different topics he has discussed how to chant the Guru Mantra correctly, how to take its vibrations to deeper levels inside the body, determination and the function of other Kriyas (practices), the various levels of Mantra recitation and its effect, what is the real guidance, and how to awken the latent energy ‘Kundalini’ through such practices. He has described in detail the various aspects of Kundalini as well to save the aspirant from any confusion and lead a safe path.

 


 

Chingar Ton Brahma Jot (Punjabi): A voluminous scripture spread in almost 935 pages is written by Swami Ji that consists of 19 extensive chapters and several sub-chapters. In this great mystagogic work, fetching into reality the grandeur of the word-consciousness in the hues of the experiences of a great searcher, he has revealed the mystery of a drop of water aggrandising into an ocean and a spark into Brahm Jot- the divine flame. The realization brewing out of the spiritual consciousness and the philosophical maxim Yat Pinde Tat Brahmande (what lies in the body, pervades through the cosmos), is the basis of the creation of this wonderful bonanza of theosophy. This is a must read for every aspirant. In fact hundreds of people have learnt punjabi for the sake of reading this wonderful text.

 


 

Gyanamrit (Hindi): This poetic creation is an elucidation of the issue bearing the path of knowledge of divine attainment, meditation and service, in a verse form. This was developed in the year 1996 in a cave of Charan Paduka above Badrinath when Swami Ji stayed there all alone for whole year watching the extreme of winter and. probably the true form of nature got him more closure to life and thus was born such incredible teaching for day to day life. All the aspect of life material or spiritual are directly addressed and tips are given to make them better and focused on the goal. There is also a huge collection of inspirational and motivational songs in the book.

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Patralok (Hindi): It is an anthology of 160 letters written as answers to the spiritual queries made by the seekers of the divine knowledge during 1990s. As that was the decade when Swami Ji used to live most of the time at solitary mountains. Even today the schedule is more or less same but for his monthly appearance on the last sunday of every month or unless he is on any of his rare tour. The guidance is still sought through letters and he never turned any query down however busy or secluded he was. though now he preferably answeres the spiritual quesries through the periodical magazine ‘Kund Agni Shikha’. Most of the people find their own queries amongst them some known and some unknown but anyway pat comes the answers.

 


 

Sadhana Sutra (Hindi): Another compilation of his dialogues talks about ‘The Goal of Life’. How are we all heading towards one single goal some knowingly while others unknowingly? Why is chanting an important practice in present age? What is the reason of our petty happiness and sorrow and how to go beyond them? And the role and importance of this human body in attainig that ‘Goal of Life’. In very short and precise statements he has provided all the clues an aspirant may seek in the begining and thus the name.

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Satopanth (Hindi): It presents a description of the elysian sights witnessed by the pilgrims 28 Kms. from the shrine of Badrinath, at the height of 16,000 feet. The last Indian village as well as last army post is just 3 Kms. from Badrinath after that there are no man or animal to be seen and even vegetation is in form of little shrubs of few inches scattered here and there. This place is considered very holy and full of divine vibrations but the the pathway is such dangerous that only the true aspirants or seekers dare to reach there. Particularly the four Kms. long glacier is toughest of the journey as you never know when you slip in one of the slits for your life. Generally some sadhus or enthusiastic devotees visit the place for Darshan but stay for hardly a day or two. But for the first time in its history there was such a huge crowd of 31 people that stayed a fortnight. Anyway, it was worth the stay as there did happen something unusual and super natural. What and how its all described in the book in the words of Swami Ji himself who lead the camp.

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